| फ़ाइल फोटो - सफ़ेद बाघ 'विजय' / छाया - सत्यप्रकाश पांडेय |
[TODAY छत्तीसगढ़] / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला मुख्यालय से लगा कानन पेंडारी मिनी जू पहुँचने वाले पर्यटकों के लिए ये खबर दुःख भरी और बेहद निराशाजनक हो सकती है। कानन पेंडारी मिनी जू में सैलानियों के आकर्षण का बड़ा केंद्र रहा 'विजय' अब नज़र नहीं आएगा। 'विजय' नाम के सफ़ेद बाघ की आज मौत हो गई है। मौत का कारण सर्प दंश बताया जा रहा है।
पिछले कुछ महीनों में देखें तो कानन पेंडारी मिनी जू की हालत भगवान् भरोसे दिखाई देती है। जू के भीतर तमाम अव्यवस्थाओं के बीच वन्य जीव हर पल असुरक्षित दिखाई देते हैं। कभी अपनी व्यवस्थाओं और वन्य प्राणियों की विभिन्नताओं के लिए मशहूर रहा कानन पेंडारी मिनी जू अब केवल विभागीय अमले के लिए आर्थिक समृद्धि का केंद्र बनकर रह गया है। पिछले कुछ समय से लगातार जानवरों की मौत इस बात की पुष्टि करती है की जू में मौजूद विभागीय अमला वन्यजीवों के प्रति संजीदा नहीं है।
विभागीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सफ़ेद बाघ 'विजय' की मौत सर्प दंश से हुई है। कानन प्रबंधन की माने तो बुधवार को विजय को सुबह नियत समय पर खुले केज में छोड़ा गया था। इसके बाद शाम को वापस बंद केज में वो चला गया, लेकिन सुबह जब उसे बंद केज से बाहर निकालने के लिए कर्मी पहुंचा तो उसके शरीर में किसी तरह की हलचल नहीं होने से वह सहम गया। सुचना आला अफसरों को दी गई, देखते ही देखते कानन पेंडारी मिनी जू प्रबंधन के बीच हड़कंप मच गया। पशु चिकत्सक डॉक्टर पीके चन्दन ने विजय को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। दोपहर बाद विजय का पोस्टमार्डम कर उसकी लाश कानन पेंडारी मिनी जू के भीतर ही जला दी गई।

