रायपुर। TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की अस्वाभाविक मौत का मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी में अंतर सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है।
विधानसभा में विधायक शेषराज हरवंश के प्रश्न के उत्तर में वन विभाग ने दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच 9 बाघ, 38 हाथी सहित कुल 562 वन्यजीवों की अस्वाभाविक मौत की जानकारी दी थी। हालांकि, रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा मांगी गई जानकारी को वन विभाग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(क) का हवाला देते हुए देने से इंकार कर दिया। विभाग का कहना है कि यह जानकारी वन्यप्राणी सुरक्षा, प्रबंधन रणनीति और शासन हित में गोपनीय है।
आंकड़ों में अंतर से बढ़ा विवाद
सिंघवी के अनुसार, विधानसभा में 38 हाथियों की मौत बताई गई, जबकि RTI में 36 का आंकड़ा दिया गया। इसी तरह 9 बाघों की मौत के बजाय एंटी-पोचिंग डेटा में केवल 2 बाघों के शिकार की जानकारी सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी वन्यजीवों की मौत कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुई—यह जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही।
RTI कानून पर उठे सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(क) राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ी सूचनाओं को गोपनीय रखने की अनुमति देती है। लेकिन सिंघवी का कहना है कि जो जानकारी विधानसभा में सार्वजनिक की जा चुकी है, उसे आम नागरिकों से छिपाना समझ से परे है।
🐾 “शिकारगढ़” बनने का आरोप
सिंघवी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में वन्यजीवों का संरक्षण कमजोर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 16 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 6 तेंदुओं की खाल जब्त की गई, जिससे हालिया शिकार की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा दंतेवाड़ा में एक बाघ की खाल जब्त होने का भी मामला सामने आया है।
बड़ा सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
👉 जो जानकारी विधानसभा में सार्वजनिक है, वह RTI में गोपनीय कैसे हो गई?
👉 क्या विभाग किसी बड़ी लापरवाही को छिपा रहा है?
👉 वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति क्या है?
