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सलाखों से बाहर आये देश के पूर्व वित्त मंत्री, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सीबीआई से पहले ही मिल चुकी है जमानत

TODAY छत्तीसगढ़   /  INX मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख के निजी मुचलके पर उन्हें सशर्त जमानत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए उन्हें जमानत दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चिदंबरम को सीबीआई से पहले ही जमानत मिल चुकी है। 
सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में लिया था। जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आज पी चिदंबरम तिहाड़ जेल से बाहर आएंगे। 
INX मीडिया मामले में सीबीआई और ईडी ने केस दर्ज किया है। इस केस में पी चिदंबरम पिछले 106 दिनों से तिहाड़ जेल में बंद हैं। सीबीआई ने 5 सितंबर को उनके दिल्ली आवास से गिरफ्तार किया था। ईडी की ओर से उन्हें बेल नहीं मिली थी। दिल्ली हाई कोर्ट में चिदंबरम को बेल के लिए याचिका लगाई गई थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। ईडी ने हाईकोर्ट से कहा था कि चिदंबरम को बाहर आने से यह केस प्रभावित हो सकता है। जिस आधार पर कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी थी। 
जिसके बाद चिदंबरम के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सर्शत जमानत दे दी है। कोर्ट ने जमानत देते हुए चिदंबरम को निर्देश दिया कि वह बिना इजाजत विदेश नहीं जा सकते हैं। साथ ही चिदंबरम गवाहों से संपर्क की कोशिश नहीं करें। वहीं वह राजनीतिक बयानबाजी या मीडिया में किसी भी तरह का इंटरव्यू नहीं दे सकते हैं। चिदंबरम जांच में सहयोग करेंगे। 
इससे पहले पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 21 अगस्त 2019 को याचिकाकर्ता को हिरासत में लिया गया था। 60 दिन बीतने के बाद भी सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल नहीं की उसके बाद इन्हें जमानत मिली। सीबीआई के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया। लेकिन ईडी भी अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई । लिहाजा इन्हें जमानत दी जाए।
आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपए के विदेशी फंड में वित्तीय अनिमितता हुई पाई गई थी। उस समय पी चिदंबरम यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे। चिदंबरम पर आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए उन्होंने इस ग्रुप को मंजूरी दे दी थी। सीबीआई ने मई 2017 को चिदंबरम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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