[TODAY छत्तीसगढ़] / पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। दिल्ली में उन्होंने सुबह 7 बजे आखिरी सांस ली। फर्नांडिस अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित थे। पीएम नरेंद्र मोदी ने फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
George Sahab represented the best of India’s political leadership.— Narendra Modi (@narendramodi) January 29, 2019
Frank and fearless, forthright and farsighted, he made a valuable contribution to our country. He was among the most effective voices for the rights of the poor and marginalised.
Saddened by his passing away.
When we think of Mr. George Fernandes, we remember most notably the fiery trade union leader who fought for justice, the leader who could humble the mightiest of politicians at the hustings, a visionary Railway Minister and a great Defence Minister who made India safe and strong.— Narendra Modi (@narendramodi) January 29, 2019
During his long years in public life, George Sahab never deviated from his political ideology. He resisted the Emergency tooth and nail. His simplicity and humility were noteworthy. My thoughts are with his family, friends and lakhs of people grieving. May his soul rest in peace.— Narendra Modi (@narendramodi) January 29, 2019
पीएम ने ट्वीट कर कहा, 'जॉर्ज साहब ने भारत की बेहतरीन लीडरशिप का प्रतिनिधत्व किया। वह बेबाक और निर्भिक थे। उन्होंने देश के लिए अमूल्य योगदान दिया। वह गरीबों की सबसे मजबूत आवाज थे। उनके निधन से दुखी हूं।' अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे फर्नांडिस ने सेना के लिए कई बेहतरीन कदम उठाए थे। फर्नांडिस की तबीयत काफी समय से खराब थी। फर्नांडिस ने रक्षा मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग संभाले थे।
तीन जून 1930 को कर्नाटक में जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे। वह हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन भाषा जानते थे। उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं। उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था।
इमर्जेंसी के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज फर्नांडिस को पगड़ी पहन और दाढ़ी रख कर सिख का भेष धारण किया था जबकि गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे। 1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया था।
इमर्जेंसी खत्म होने के बाद फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से लड़े और रेकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। जनता पार्टी की सरकार में वह उद्योग मंत्री बनाए गए थे। बाद में जनता पार्टी टूटी, फर्नांडिस ने अपनी पार्टी समता पार्टी बनाई और बीजेपी का समर्थन किया। फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक जीवन में कुल तीन मंत्रालयों का कार्यभार संभाला - उद्योग, रेल और रक्षा मंत्रालय।
