[TODAY छत्तीसगढ़ ] / कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और यूपीए सरकार में मंत्री रहे वीरप्पा मोइली सोमवार को बिलासपुर पहुंचे, पार्टी कार्यालय में मोइली ने पत्रकारों से औपचारिक बातचीत की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर अपने तेवर तल्ख रखे। छत्तीसगढ़ की रमन सरकार के विकास दावों पर वीरप्पा मोइली ने कहा की 15 साल पहले राज्य में 32 लाख परिवार गरीब थे, आज 45 लाख परिवार गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी जी रहे हैं। राज्य नक्सल जैसी गंभीर और चिंताजनक समस्या से जूझ रहा है। रोजगार के अवसर दिखाई नहीं पड़ते, किसान सरकार की उपेक्षा का शिकार है। मोइली इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार को अब तक की सबसे असफल सरकार बताया है ।
कांग्रेस भवन में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा छत्तीसगढ़ में विकास नहीं दिखता, सरकारी गरीबों की संख्या और वास्तविक गरीबों की संख्या में अंतर है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या गंभीर है लेकिन रमनसिंह की सरकार उस मसले पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रही। उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया की रमन के शासनकाल में छत्तीसगढ़ में नक्सली संख्या और घटनाएं दोनों बढ़ी हैं। रोजगार के मुद्दे पर मोइली का साफ़ कहना है की केंद्र की यूपीए सरकार ने मनरेगा के तहत प्रत्येक गाँव के मजदुर को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी, बाद में नरेगा के तहत 150 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया। छत्तीसगढ़ में रमन की सरकार ने एक मजदूर को औसत तीस दिन से ज्यादा का रोजगार नहीं दिया। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश की बातें सरकार ने की लेकिन धरातल पर कोई भी उपक्रम दिखाई नहीं देता।
उन्होंने छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी के मामले पर भी काफी कुछ कहा, मोइली बोले राज्य से 37 हजार महिलाएं लापता हैं। महिला सुरक्षा का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार आखिर क्यों इस मामले पर गंभीर नहीं है ? छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था का हाल बुरा है, राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाएं उसकी पुष्टि करती। हैं
केंद्रीय राजनीति में दशकों से सक्रीय रहे मोइली बोले केंद्र की मोदी सरकार भी केवल जुमलेबाजी के दम पर देश को चला रही है। देश की जनता पर एक तरफ टैक्स की मार है तो दूसरी तरफ महगाई ने पूरी कमर ही तोड़ दी है। रसोई गैस, डीजल पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। उन्होंने बताया की यूपीए सरकार में वे पेट्रोलियम मंत्री थे, अंतराष्ट्रीय बाजार में 100 डालर तक कीमत होने के बावजूद 70 रूपये लीटर से ज्यादा पेट्रोल की कीमते नहीं हुईं। उन्होंने देश की बिगड़ी अर्थ व्यवस्था पर भी चिंता जाहिर की।
सवाल जवाब के क्रम में मोइली भी कांग्रेस के उसी रिकार्ड को फिर दोहरा गए, उन्होंने कहा कांग्रेस की सरकार आई तो किसानो का कर्जा दस दिन के भीतर माफ़ कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार ने आउटसोर्सिंग के रास्ते नौकरियां बांटी जिससे यहां का बेरोजगार रोजगार से वंचित रहा। राज्य में सरकार बनते ही इस मामले पर पार्टी प्राथमिकता से काम करेगी। राज्य में आउटसोर्सिंग को बंद कर राज्य के बेरोजगारों को रोजगार दिए जायेंगे। उन्होंने विधानसभा चुनाव की टिकट वितरण में खरीद-फरोख्त के सवाल को सिरे से खारिज कर दिया।
[TODAY छत्तीसगढ़ ] / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की बिल्हा विधानसभा सीट से दावेदारों की भीड़ में शामिल रहीं कांग्रेस नेत्री और पूर्व सदस्य जिला पंचायत अम्बालिका साहू टिकट कटने के बाद पहले आहत हुईं फिर फूटफूटकर रोईं। कांग्रेस में जमीनी सिपाही के रूप में काम के बदले टिकट ना मिलने के मलाल का आंसू जब आँखों से सूखा तो वे बागी हो गईं। कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ ताल ठोंकी लेकिन सियासत की जमीन में हर चाल पर चाल चलने में माहिर राजेंद्र ने आखिरकार रूठी हुई अम्बालिका को मना ही लिया। आज नाम वापसी के साथ कांग्रेस के लिए फिर से काम करने का मन बनाकर वो घर [कांग्रेस] लौट आईं।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए हुए टिकट वितरण के बाद घमासान सिर्फ कांग्रेस में मचा ऐसा भी नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के अलावा जोगी कांग्रेस में भी खूब उठापटक की ख़बरें आती रहीं। भाजपा और कांग्रेस में ज्यादा सर फुटव्वल हुआ, कई जगह अब भी जारी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले की बिल्हा विधानसभा सीट से जिला पंचायत की सदस्य रहीं कांग्रेस नेत्री अम्बालिका साहू ने टिकट ना मिलने से प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला की चुनावी राह में परेशानियों के कांटे बिछा दिए थे। नामांकन दाखिले के बाद से लगातार अम्बालिका को मनाकर मुश्किलें कम करने की कोशिशें होती रहीं जो आज खत्म होती दिख रहीं हैं। आज नाम वापसी के साथ ही अम्बालिका ने पार्टी प्रत्याशी राजेंद्र के पक्ष में काम करने की बात कही, उन्होंने बगावत को तात्कालिक गुस्सा बताया। इस सियासी घटनाक्रम का पटाक्षेप होने के बाद बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने बताया की कांग्रेस का परिवार बहुत बड़ा है, आपसी विवाद से कोई कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ जाकर काम नहीं करता। अम्बालिका ने पार्टी की प्राथमिक सदस्य्ता से इस्तीफा देने का पत्र संगठन को भेजा था जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
इधर बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय की भाभी चारुलता पांडेय ने भी आज अपना नामांकन वापस ले लिया है। अब वे पार्टी प्रत्याशी विद्यारतन भसीन का समर्थन करेंगी। सरोज पांडेय की भाभी टिकट नहीं मिलने से भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने को उतारू थीं। उन्होंने नामांकन दाखिल कर भाजपा प्रत्याशी के पसीने छुड़ा दिए थे लेकिन बागी चारुलता को आखरी वक्त में मना लिया गया।
[TODAY छत्तीसगढ़ ] / छत्तीसगढ़ सूबे की न्यायधानी बिलासपुर में आज धनतेरस पर एक तरफ जहाँ बर्तन, सराफा, आटोमोबाइल्स के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ार में पैर रखने की जगह नहीं थी, उसी बाजार में धान की बालियों से बनी झालर मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रही । दीपावली के मौके पर अपने घरों में धान का झालर लगा कर मां लक्ष्मी का स्वागत करने लोग बड़े पैमाने पर धान बालियों से तैेयार झालर खरीद रहे थे।
धार्मिक रूप से इस झालर का महत्व भी है और इसे बनाने वाले इसकी अनेंक डिज़ाईनें भी बनाते हैं। जानकार बताते हैं की कुछ गाँव में एक खास प्रकार की झालर बनतीं हैं जिसका ग्रामीण अंचल में होने वाली शादियों में भी काफी महत्व है। पूजा कमरों के अलावा इन झालर को ग्रामीण- आंगन में, छतों में रखते हैं। ऐसी मान्यता भी है की नई फसल आने के बाद किसान धान की बालियों को गूंथकर एक झालर बनाते है और उसे अपने घर के बाहर लगा कर उन चिड़ियों [पक्षियों, गौरैया] का उपकार अदा करने की कोशिश करते हैं जिन्होंने खेत में लगी फसल को कीड़ों से बचाया था। चूँकि खेत में अब फसल नहीं है इस कारण पक्षियों को घर बुलाने के निमंत्रण की ये झालर कुछ दिन गौरैया का पेट भरने के काम आएगी। गाँव की ये परम्परा अब बाजारवाद के रंग में रंगी दिखाई पड़ती है। शहर में पक्षियों का अकाल है फिर भी धान की बालियों की ये झालर हर साल इसी मौसम में गाँव से चलकर बाज़ार तक आती है, लोग अब इन झालरों को सिर्फ घर की शोभा बढ़ाने के लिए लगाते है।





