कैमरे की कलम: अंधेरे का आत्मनिर्भर भारत


छत्तीसगढ़ के दूसरे बड़े शहर के रूप में अपनी पहचान रखने वाले बिलासपुर ने पिछले दिनों आखिरकार विकास की उस ऊंचाई को छू ही लिया, जहां आदमी को यह समझ में आ जाता है कि असली सभ्यता बिजली नहीं, मोमबत्ती है। बात पिछले मंगलवार की है, शहर और आस-पास के इलाकों में 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली और पूरा शहर ऐसी विनम्रता से अंधेरे में समा गया, जैसे किसी सरकारी दफ्तर में आम आदमी की अर्जी समा जाती है। गाँवों का हाल तो पूछिए ही मत। 

आंधी आई। पेड़ गिरे। तार टूटे। खंभे झुके। और उसके साथ ही “जीरो पॉवर कट” का दावा भी कहीं उड़ गया। हालांकि सरकार को धन्यवाद देना चाहिए कि उसने जनता को इतिहास से जोड़ दिया। नई पीढ़ी को पहली बार पता चला कि बिना वाई-फाई, बिना चार्जर और बिना एसी के भी इंसान जिंदा रह सकता है। कुछ बच्चों ने तो पहली बार अपने माता-पिता से बातचीत तक कर ली। यह सामाजिक क्रांति बिजली विभाग के बिना संभव नहीं थी। शुरू में लोगों ने धैर्य रखा। उन्हें भरोसा था कि बिजली विभाग है, कर्मचारी हैं, सिस्टम है। फिर धीरे-धीरे उन्हें याद आया कि यही सबसे बड़ी समस्या है।

पहले छह घंटे बीते। फिर बारह। फिर चौबीस। कुछ इलाकों में तो तीस घंटे बाद बिजली आई। तब तक लोग आधुनिक नागरिक से बदलकर आदिम मानव बन चुके थे। फ्रिज में रखा दूध दही बन चुका था, दही खट्टा होकर विज्ञान प्रयोगशाला का नमूना लगने लगा था और बच्चे मोबाइल चार्ज न होने के कारण पहली बार अपने माता-पिता का चेहरा पहचानने लगे थे। शहर अंधेरे में डूबा रहा और बिजली विभाग “स्थिति पर नजर” रखता रहा। हमारे यहां “स्थिति पर नजर रखना” बहुत महत्वपूर्ण सरकारी काम है। सड़क टूटे—नजर रखो। पुल गिरे—नजर रखो। बिजली जाए—नजर रखो। ऐसा लगता है कि पूरा प्रशासन किसी दूरबीन के सहारे चल रहा है।

सबसे महान संस्था साबित हुआ फ्यूज कॉल सेंटर। जनता फोन लगाती रही और उधर से वही सन्नाटा मिलता रहा, जो चुनाव के बाद जनता को अपने नेता के फोन में मिलता है। कभी-कभी फोन उठ भी गया तो जवाब आया—“टीम काम कर रही है।” यह टीम भारतीय लोकतंत्र की तरह रहस्यमयी होती है। सब उसका नाम लेते हैं, मगर किसी ने उसे काम करते नहीं देखा। फिर मोबाइल पर संदेश आया—“आपकी समस्या का समाधान कर दिया गया है।” यह संदेश पढ़कर अंधेरे में बैठे आदमी के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा जाग उठी। उसने महसूस किया कि असली रोशनी भीतर होती है। बाहर का अंधेरा तो मोह-माया है। पंखा बंद है, फ्रिज सड़ चुका है, पानी नहीं आ रहा, मच्छर खूनदान शिविर चला रहे हैं, लेकिन विभाग कह रहा है—समस्या हल हो गई। यही डिजिटल इंडिया है।

दरअसल, हमारी बिजली व्यवस्था बहुत भावुक है। हल्की हवा चले तो नाराज हो जाती है। बारिश हो तो बैठ जाती है। पेड़ हिले तो बेहोश हो जाती है। और यदि 95 किलोमीटर की हवा चल जाए, तो फिर पूरा सिस्टम सामूहिक अवकाश पर चला जाता है। मगर सबसे बड़ी कला सरकार की भाषा में है। जनता अंधेरे में तड़प रही होती है और बयान आता है—“बिजली व्यवस्था तेजी से बहाल की जा रही है।” यह “तेजी” इतनी अद्भुत होती है कि कछुआ भी शर्म से इस्तीफा दे दे। सरकारें दावा करती हैं कि हमने गांव-गांव बिजली पहुंचा दी। बिल्कुल पहुंचाई। फिर वापस भी ले ली।

स्थानीय प्रशासन बिजली व्यवस्था को की बुनियादी खामियों को दूर करने के लिए गंभीरता का परिचय देता है, सवाल यह है कि जनता भी आखिर कब तक गंभीर रहे? तीस घंटे बिजली न हो तो आदमी लोकतंत्र से ज्यादा मच्छरों पर विश्वास करने लगता है।

रेलवे स्टेशन से 17 किलो गांजा बरामद, महिला समेत तीन गिरफ्तार


रायगढ़। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन आघात” के तहत अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में थाना कोतवाली, साइबर थाना और रेलवे पुलिस की संयुक्त टीम ने रायगढ़ रेलवे स्टेशन के सामने पार्किंग क्षेत्र से महिला समेत तीन आरोपियों को भारी मात्रा में गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 17.726 किलोग्राम गांजा और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 1 लाख 79 हजार 500 रुपये बताई गई है।

जानकारी के अनुसार 8 मई 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के सामने पार्किंग क्षेत्र में शिव मंदिर के पास पीपल पेड़ के नीचे तीन संदिग्ध बैग लेकर बैठे हैं और उनके पास मादक पदार्थ गांजा मौजूद है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान सिद्धांत गोन्डा, कश्यप साहनी और चंद्रिका साहनी के रूप में बताई। तीनों आरोपी ओडिशा के कंधमाल जिले के रहने वाले हैं।

तलाशी के दौरान एक बैग से 6.382 किलो, ट्रॉली बैग से 8.084 किलो और दूसरे बैग से 3.304 किलो गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कीपैड मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गांजा ओडिशा के कंधमाल जिले से खरीदकर मध्यप्रदेश के खुरई में बेचने ले जा रहे थे। रायगढ़ पहुंचने के बाद वे आगे जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे। आरोपियों के पास गांजा परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। थाना कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर महिला से 1.04 करोड़ की साइबर ठगी


बिलासपुर। 
 TODAY छत्तीसगढ़  / रेंज साइबर थाना बिलासपुर ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक महिला को पुलिस, ईडी, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का भय दिखाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की थी। पुलिस के अनुसार प्रकरण में अपराध क्रमांक 02/2026 के तहत धारा 318(4), 308(6), 3(5) बीएनएस और 66C, 66D आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पीड़िता के मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल कर एक व्यक्ति ने खुद को “संजय PSI” बताकर संपर्क किया। आरोपियों ने महिला को बताया कि उनका नाम एक आतंकवादी संगठन से जुड़े मामले में आया है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए महिला को कई घंटों तक कथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया। आरोपियों ने पुलिस, ईडी, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर लगातार दबाव बनाते हुए महिला को डराया। यहां तक कहा गया कि यदि उन्होंने परिवार के किसी सदस्य से संपर्क किया तो उनके बेटे और अन्य परिजनों को भी मामले में फंसा दिया जाएगा। विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने महिला को फर्जी सरकारी नोटिस, ईडी जांच दस्तावेज, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आरबीआई नोटिस भी भेजे। लगातार मानसिक दबाव और भय के कारण महिला आरोपियों के झांसे में आ गई।

1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ट्रांसफर

आरोपियों ने महिला को अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। अलग-अलग तारीखों में कुल 1,04,80,000 रुपये विभिन्न खातों में जमा कराए गए। इसके बाद भी आरोपियों द्वारा केस खत्म करने के नाम पर अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। जब पीड़िता ने पूरी बात अपने पुत्र को बताई, तब मामला सामने आया और साइबर थाना बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई गई।

तकनीकी जांच में खुला नेटवर्क

साइबर पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई लेयर बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर की गई थी। बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान के चुरू जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में रूपेन्द्र सिंह और विशाल सिंह शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे और ठगी की रकम निकालकर अन्य लोगों तक पहुंचाई थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाया गया है। मामले में अन्य आरोपियों और साइबर नेटवर्क की जांच जारी है।

कलेक्ट्रोरेट में नौकरी लगाने के नाम पर 3.38 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार


रायगढ़।
  TODAY छत्तीसगढ़  /कोतरारोड़ पुलिस ने कलेक्ट्रोरेट सारंगढ़ में कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने संविदा नियुक्ति कराने का भरोसा दिलाकर युवती से 3 लाख 38 हजार 500 रुपये ऐंठ लिए और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लंबे समय तक गुमराह करता रहा।

पुलिस के अनुसार ग्राम कोतरा निवासी पदिमनी यादव ने 3 अप्रैल 2026 को थाना कोतरारोड़ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसकी भतीजी के माध्यम से उसकी पहचान आरोपी हरीश मिश्रा से हुई थी। आरोपी ने कलेक्ट्रोरेट सारंगढ़ में कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर संविदा नियुक्ति दिलाने का भरोसा देकर 9 फरवरी से 22 मार्च 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों में नकद और फोन-पे के जरिए कुल 3,38,500 रुपये ले लिए।

जब लंबे समय तक नियुक्ति नहीं हुई तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। इसी दौरान उसने “कॉल मी सर्विसेस” नामक संस्था का एक कथित नियुक्ति पत्र पीड़िता को दिया। पीड़िता जब दस्तावेज लेकर कलेक्ट्रोरेट रायगढ़ पहुंची तो जांच में नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी पाया गया।

शिकायत के आधार पर थाना कोतरारोड़ में आरोपी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। फरारी के दौरान आरोपी के जशपुर में छिपे होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि वह अधिकांश रकम खर्च कर चुका है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त रियलमी मोबाइल फोन और 900 रुपये नकद जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले श्रम विभाग रायगढ़ में भृत्य के पद पर कार्यरत रह चुका है और उसके खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें रही हैं। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

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