TODAY छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा के दावों पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है. तखतपुर विकासखंड के चितावर गांव की एक पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल) पिछले तीन सालों से महज़ एक शिक्षक के भरोसे चल रही है.
आश्चर्य की बात यह है कि इस स्कूल में क़रीब 120 बच्चे नामांकित हैं, जिनकी पढ़ाई और मूल्यांकन की पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ इसी एक शिक्षक के कंधों पर है.
क्या है पूरा मामला?
चितावर गांव के ग्रामीणों और पंचायत के मुताबिक़, पिछले तीन सालों से स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है. एक ही शिक्षक होने के कारण सभी कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ता है, जिससे न तो बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पाता है और न ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति तब है, जब सरकार की ओर से नई शिक्षा नीति, डिजिटल क्लासरूम और स्मार्ट एजुकेशन को लेकर लगातार ज़ोर दिया जा रहा है.
कलेक्टर को लिखा गया पत्र, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
मामले के समाधान के लिए ग्राम पंचायत चितावर की सरपंच इंद्राणी देवी सिंगरौल ने अब ज़िले के कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें तत्काल नए शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की गई है.
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को पहले भी कई बार इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं.
ग्रामीणों ने दी 'चक्का जाम' की चेतावनी
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इस प्रशासनिक लेटलतीफ़ी से अभिभावकों और गांव वालों में काफ़ी नाराज़गी है.
पंचायत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्रामीण अंचल के बच्चों का भविष्य इस तरह दांव पर नहीं लगाया जा सकता. यदि प्रशासन ने जल्द ही स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की, तो गांव वाले सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और 'चक्का जाम' करने को मजबूर होंगे.
फ़िलहाल प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.

