O मोदी सरकार पर राम मंदिर निर्माण को लेकर बढ़ते दबाव के बीच धर्मगुरु रामभद्राचार्य ने दावा किया है कि 11 दिसंबर के बाद उच्चस्तरीय बैठक कर बड़ा फैसला लिया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद की ओर से अयोध्या में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए रविवार को उन्होंने कहा, 23 नवंबर को केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के साथ चर्चा हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि 11 दिसंबर को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साधु-संतों के साथ बैठेंगे और राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा। वीएचपी लीडर ने कहा, ‘हमें यह भी बताया गया है कि हमसे धोखाधड़ी नहीं की जाएगी। संसद के शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाया जा सकता है, ऐसे में हमें धैर्य रखना चाहिए। न्यायालय से हम निराश हो चुके हैं। जनता की अदालत हमें धोखा नहीं देगी।’ केंद्रीय मंत्री का नाम न बताते हुए रामभद्राचार्य ने कहा, 'उन्होंने मुझे नाम न बताने को कहा है इसलिए मैं ऐसा नहीं कर सकता हूं।' उन्होंने कहा कि मैंने उनसे पूछा कि राम मंदिर के लिए हमें कब तक इंतजार करना पड़ेगा। इस पर उन्होंने (केंद्रीय मंत्री) जवाब दिया कि 11 दिसंबर के बाद इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बड़ी बैठक होनेवाली है।
O संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है, जिस दिन भारत के संविधान मसौदे को अपनाया गया था। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने से पहले 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया था। सरकार ने 19 नवंबर, 2015 को राजपत्र अधिसूचना की सहायता से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में घोषित किया था। संविधान दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू ने ट्वीट किया, “मैं आज संविधान दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई देता हूं। इस दिन, 1949 में, भारत के विवेकशील लोगों ने खुद को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के सक्षम मार्गदर्शन के तहत तैयार संविधान दिया था।” उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने 395 अनुच्छेद और आठ अनुसूची वाले मसौदा संविधान को अपनाया था, जिस पर दो साल 11 महीनों और 17 दिनों की अवधि में हुए 11 सत्रों के दौरान संविधान सभा के 299 सदस्यों के बीच पूरी तरह से बहस हुई थी। नायडू ने कहा कि अब यह हमारा सवोर्च्च राष्ट्रीय दायित्व है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में संविधान की भावना के प्रति ईमानदार रहे। उपराष्ट्रपति ने कहा, “हमें अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए, संवैधानिक निकायों और प्रक्रियाओं में विश्वास करना चाहिए और उनका सम्मान करना होना चाहिए। संविधान दिवस पर मेरी हार्दिक बधाई।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर कहा, “संविधान दिवस पर हम हमारे संविधान सभा में सेवा देने वाले महान लोगों के शानदार योगदान को गर्व के साथ याद करते हैं। हमें हमारे संविधान पर गर्व है और इसमें निहित मूल्यों को बनाए रखने के लिए हमारी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।”
O संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है, जिस दिन भारत के संविधान मसौदे को अपनाया गया था। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने से पहले 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया था। सरकार ने 19 नवंबर, 2015 को राजपत्र अधिसूचना की सहायता से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में घोषित किया था। संविधान दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू ने ट्वीट किया, “मैं आज संविधान दिवस के अवसर पर देशवासियों को बधाई देता हूं। इस दिन, 1949 में, भारत के विवेकशील लोगों ने खुद को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के सक्षम मार्गदर्शन के तहत तैयार संविधान दिया था।” उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने 395 अनुच्छेद और आठ अनुसूची वाले मसौदा संविधान को अपनाया था, जिस पर दो साल 11 महीनों और 17 दिनों की अवधि में हुए 11 सत्रों के दौरान संविधान सभा के 299 सदस्यों के बीच पूरी तरह से बहस हुई थी। नायडू ने कहा कि अब यह हमारा सवोर्च्च राष्ट्रीय दायित्व है कि हम अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में संविधान की भावना के प्रति ईमानदार रहे। उपराष्ट्रपति ने कहा, “हमें अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए, संवैधानिक निकायों और प्रक्रियाओं में विश्वास करना चाहिए और उनका सम्मान करना होना चाहिए। संविधान दिवस पर मेरी हार्दिक बधाई।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर कहा, “संविधान दिवस पर हम हमारे संविधान सभा में सेवा देने वाले महान लोगों के शानदार योगदान को गर्व के साथ याद करते हैं। हमें हमारे संविधान पर गर्व है और इसमें निहित मूल्यों को बनाए रखने के लिए हमारी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।”
O राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा धैर्य का समय अब खत्म हुआ और अगर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला उच्चतम न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है तो मंदिर निर्माण कार्य के लिये कानून लाना चाहिए.राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर यहां विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से आयोजित एक रैली में भागवत ने कहा कि यह ‘‘आंदोलन का निर्णायक चरण'' है. उन्होंने कहा, ‘‘एक साल पहले मैंने स्वयं कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा. अब हमें लोगों को एकजुट करने की जरूरत है. अब हमें कानून की मांग करनी चाहिए.'' भागवत ने कहा, ‘‘चाहे जो भी कारण हो क्योंकि अदालत के पास समय नहीं है या राम मंदिर मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है अथवा संभवत: वह समाज की संवेदनशीलता को नहीं समझ पा रही है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस बारे में विचारे कि मंदिर निर्माण के लिये कैसे एक कानून लाया जाये... कानून जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए.''उन्होंने कहा, ‘‘अब यह आंदोलन का निर्णायक चरण है. टिप्पणियां संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को हिंसा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें दृढ़ होना चाहिए कि सरकार इसके लिए कानून बनाए. भागवत ने यहां विश्व हिंदू परिषद की धर्म सभा में कहा, "हमें लड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन दृढ़ होने की जरूरत है. हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि सरकार को अब मंदिर बनाना चाहिए. हमें अब सरकार से इसके लिए कानून बनाने की मांग करनी है. हमें सरकार पर दवाब बनाने की जरूरत है."उन्होंने कहा, "अगर एक सरकार मंदिर बनाना चाहती है और नहीं बना पा रही है तो जनता के दवाब से उसे शक्ति मिलती है. मंदिर के लिए पूरे देश को खड़े होने की जरूरत है."उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, "इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है. हमें एक भव्य राम मंदिर की जरूरत है. यह बिल्कुल वैसे बनना चाहिए जैसा हमने सोचा है। यह उन्हीं हाथों से बनना चाहिए जिन्होंने इसे 80 के दशक में बनाने का प्रयास किया था. इसके लिए हमें पूरे समाज को जुटाना होगा."उन्होंने कहा कि समाज कानून के अनुसार नहीं बल्कि मन के अनुसार चलेगा.उन्होंने कहा, "दुनिया में हर जगह ऐसा ही है. कानून को इसे समझने की जरूरत है, वहीं समाज कानून का सम्मान करता है."उन्होंने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राम मंदिर का निर्माण उसकी प्राथमिकता नहीं है. अदालत ने 2010 में निर्णय किया था कि भगवान राम का जन्म वहां हुआ था. यह उनका स्थान है. तब एक उम्मीद जागी थी कि राम मंदिर का निर्माण होगा. लेकिन मामला एक नई पीठ के पास चला गया जिसने इसे फिर आगे बढ़ा दिया. अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि यह उसकी प्राथमिकता नहीं है."
O छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में मतदान के बाद स्ट्रांगरूम में जमा ईवीएम में सेंधमारी की आशंका पर रखवाली के लिए पहरा दे रहे एक कांग्रेस कार्यकर्ता की रविवार को मौत होने से हड़कंप मच गया. मौत के कारण का अभी तक पता नहीं चल सका है. पार्टी पदाधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है. कांग्रेस कार्यकर्ता पंकज पार्टी प्रत्याशी यू.डी. मिंज और उनके समर्थकों के साथ ईवीएम की रखवाली कर रहा था. अचानक हालत खराब हो गई और अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने से स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों में शोक की लहर दौड़ गई. कांग्रेस जिलाध्यक्ष पवन अग्रवाल ने पंकज के मौत की पुष्टि की है. जिलाध्यक्ष ने बताया कि पंकज कुनकुरी के कलीबा गांव का रहने वाला था. शनिवार दोपहर करीब दो बजे अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई और उसे जिला अस्पताल जशपुर लाया गया. यहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए अम्बिकापुर रेफर कर दिया.उपचार के दौरान युवक की रविवार तड़के करीब तीन बजे मौत हो गई.
O जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पंजाब के पठानकोट रेलवे स्टेशन पर जम्मूतवी पूजा एक्सप्रेस से 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. इनको ट्रेन रुकवाकर हिरासत में लिया गया है. यह ट्रेन जम्मू से दिल्ली आ रही थी. आशंका जताई जा रही है कि ये संदिग्ध किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे. अमृतसर के निरंकारी भवन पर हमले के बाद इन संदिग्धों की गिरफ्तारी सामने आई है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने इस्लामिक स्टेट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर के तीन आतंकियों को गिरफ्तार करने में भी कामयाबी हासिल की है. इन संदिग्ध आतंकियों के पास से हथियार, ग्रेनेड और विस्फोटक भी बरामद हुए हैं. गिरफ्तार किए गए ये तीनों संदिग्ध जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं. गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान जम्मू कश्मीर के त्राल निवासी ताहिर अली खान, बडगाम निवासी हरीश मुश्ताक खान और रैनावाड़ी निवासी आसिफ सुहैल नडाफ के रूप में हुई है. ताहिर अली खान के पिता का नाम अली मोहम्मद, हरीश मुश्ताक खान के पिता का नाम मुश्ताक अहमद और आसिफ सुहैल नदाफ के पिता का नाम लतीफ बताया जा रहा है.इससे पहले अमृतसर के निरंकारी भवन में हुए हमले में दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनकी पहचान विक्रमजीत सिंह और अवतार सिंह के रूप में हुई है. अवतार सिंह ने ही निरंकारी भवन में सत्संग कर रहे अनुयायियों पर ग्रेनेड फेंका था, जबकि विक्रमजीत सिंह भवन के बाहर मोटरसाइकिल पर इंतजार कर रहा था और उसने गेट पर खड़े दो लोगों को बंदूक की नोक पर ले रखा था, ताकि वे शोर न मचा सकें.विक्रमजीत सिंह पंजाब का स्थानीय निवासी है. उसने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की मदद से इस हमले को अंजाम दिया था. इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हो गए थे. यह ग्रेनेड हमला अमृतसर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित आदिलवाल गांव में निरंकारी पंथ के सत्संग भवन में हुआ था.
यह हमला उस वक्त हुआ था जब लोग प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे. वहां करीब 200 लोग मौजूद थे. देश-विदेश में निरंकारी अनुयायियों की संख्या लाखों में है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है. इस हमले के लिए पैसा और ग्रेनेड पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकी हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी ने मुहैया करवाया था.पटियाला से कुछ दिन पहले पकड़े गए खालिस्तान गदर फोर्स के आतंकी शबनम दीप सिंह ने इसके लिए स्लीपर सेल के माध्यम से इन दो लड़कों को बरगला कर अपने साथ जोड़ा था. शबनम दीप सिंह ने गरीब लड़कों को खालिस्तान के नाम पर बरगला कर उनको चंद हजार रुपये देकर हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए तैयार किया था. उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई थी.

